Dilip Kumar की कब्र पर खड़े अमिताभ बच्‍चन का ऐसा था हाल, सुनाई पहली मुलाकात की कहानी

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Dilip Kumar की कब्र पर खड़े अमिताभ बच्‍चन का ऐसा था हाल, सुनाई पहली मुलाकात की कहानी

 दिलीप कुमार (Dilip Kumar) के जाने का गम हम सभी को भीतर तक कचोट रहा है। बुधवार सुबह उनके निधन की खबर ने हर किसी को रुलाया। क्‍या हिंदुस्‍तान और क्‍या पाकिस्‍तान, हर आंख नम हुई। महानायक अमिताभ बच्‍चन (Amitabh Bachchan) भी दिलीप साहब के जाने से गहरे सदमे में हैं। 



बुधवार शाम को वह भारतीय सिनेमा के पहले सुपस्‍टार को विदाई देने कब्रिस्‍तान (Amitabh at Dilip Kumar's last Rites) भी पहुंचे थे। अमिताभ ने अब अपने ब्‍लॉग पर दिलीप कुमार से जुड़ी यादों को सहेजा है। उन्‍होंने बताया है कि दिलीप साहब की कब्र पर पहुंचकर उन्‍हें क्‍या एहसास हुआ। अमिताभ और दिलीप साहब ने 'शक्‍त‍ि' (Shakti) फिल्‍म में साथ काम किया था। फिल्‍म में दिलीप कुमार पिता के रोल में थे और अमिताभ उनके बेटे के किरदार में

'जब पहली बार दिलीप साहब को पर्दे पर देखा'

अमिताभ अपने ब्‍लॉग में उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्‍हें सिनेमाघर जाने की इजाजत नहीं थी। वह पर्दे पर दिलीप कुमार की करिश्‍माई कहानियां लोगों से सुना करते थे। अमिताभ ने लिखा है कि जब उन्‍होंने पहली बार दिलीप कुमार को पर्दे पर देखा और जब उनसे पहली बार आमने-सामने मिले तो कैसे उनकी आंखें चौंध‍िया गई थीं। वह एक पल के लिए जैसे थम से गए थे। वह लिखते हैं, 'चारों ओर जो नाम सुनाई दे रहा था, उसने अचानक आकार ले लिया, वहीं मेरे सामने स्क्रीन पर.. बड़े और काले और सफेद रंग में.. वह नाम, वह सीन बार-बार जेहन में आता है.. दिलीप कुमार .. उनकी मौजूदगी में कुछ तो बात थी.. जब वह पर्दे पर आए तो बाकी सारी चीजें धुंधली हो गईं.. जब उन्होंने बात की, तो सब सही लगा, उनकी बातों से पूरी तरह सहमत.. और तब आप इन सब को समेटते हुए वापस घर आते हैं.. और यह आपके साथ रहता है, हमेशा।'

'आज भी खाली है वह ऑटोग्राफ बुक'

अमिताभ बच्‍चन ने ब्‍लॉग में उस वाकये को भी साझा किया है, जब एक रेस्‍त्रां में दिलीप कुमार को देखने के बाद वह पूरे आत्‍मविश्‍वास के साथ उनके पास ऑटोग्राफ लेने पहुंचे थे। बिग बी लिखते हैं, 'उस कंपकंपी वाले एक्‍साइटमेंट और बहुत सोच-विचार के बाद मैंने उन तक जाने और उनका ऑटोग्राफ लेने का निर्णय किया.. लेकिन मेरे पास कोई ऑटोग्राफ बुक नहीं थी.. मैं वापस सड़क पर गया, वहां से एक किताब खरीदी और फिर से रेस्‍त्रां के अंदर पहुंचा। राहत मिली कि वह अभी भी वहीं थे.. उनके पास गया.. वह बातचीत में मशगूल थे.. मैंने सामान्य रूप से अपनी बात कही और वह किताब आगे बढ़ा दी... कोई रिऐक्‍शन नहीं आया.. उन्‍होंने मेरी ओर या मेरी किताब की ओर नहीं देखा.. थोड़ी देर बाद वह वहां से उठे और दरवाजे से बाहर चले गए.. वह ऑटोग्राफ बुक आज भी मेरे हाथों में है और खाली है.. वहां ऑटोग्राफ बुक महत्‍वपूर्ण नहीं थी, उनकी मौजूदगी थी.. बस।'

'उनकी आंखें, चाल, शब्‍द... सब एक कविता की तरह'

अमिताभ बच्‍चन न सिर्फ दिलीप साहब की अदाकारी के फैन रहे हैं, बल्‍क‍ि उनकी पर्सनैलिटी और निजी और सार्वजनिक जीवन में उनके व्‍यवहार के भी कायल हैं। अमिताभ लिखते हैं, 'आप स्‍क्रीन पर उनकी परफॉर्मेंस या सार्वजनिक जीवन में भी उनके व्‍यवहार में एक कमी नहीं निकाल सकते... उनकी आंखें, उनके चलने का ढंग, हर हरकत, उनकी हर कहे गए शब्‍द किसी कविता की तरह थे.. ग्राफ और टोन, उनकी खामोशी भी तेज आग की तरह है, जैसे एक ट्रेन दौड़ती है, दुख को जाहि‍र करने की अदा, उनके अंदर सीखने की असंगत अभिव्यक्तियां थीं।'

'...और मैं उनकी कब्र पर खड़ा था'

अमिताभ बच्‍चन, बुधवार 7 जुलाई को दिलीप कुमार को अंतिम प्रणाम करने कब्रिस्‍तान भी पहुंचे थे। ब्‍लॉग में इसका जिक्र करते हुए वह लिखते हैं, 'मैं धरती पर मिट्टी के उस ढेर के सामने खड़ा हुआ, जिसे अभी अभी खोदा गया.. उस ढेर पर बिखरी कुछ मालाएं और फूल हैं.. और उसके आसपास कोई नहीं.. वह उसके नीचे सोए हुए हैं.. शांतिपूर्ण है और बिल्‍कुल शांत.. यह विशाल उपस्थिति.. प्रतिभा का यह पहाड़.. एक शानदार रचनात्मक दूरदर्शी.. सर्वश्रेष्‍ठ की यह सर्वश्रेष्‍ठता.. परम.. अब कब्र के एक छोटे से ढेर में सिमट गया है.. वह चला गया है।'

'दिलीप कुमार से पहले... दिलीप कुमार के बाद'

अपने ब्‍लॉग के अंत में अमिताभ लिखते हैं, 'इतिहास हमेशा रहेगा.. दिलीप कुमार से पहले और दिलीप कुमार के बाद.. ऐसा हमेशा से था.. अब पहले से कहीं ज्यादा है।'