योगी आदित्यनाथ ऑफिस ने लिखा है कि तीन साल पहले न कोरोना जैसी आपदा थी और न लकड़ियों की कमी, फिर भी तस्वीरें ऐसी ही थीं. यानी गंगा किनारे शवों को दफ़न करने की परंपरा काफी अरसे से चली आ रही है.
दरअसल एक हिंदी दैनिक ने अपने फोटोग्राफर द्वारा 18 मार्च 2018 को संगम किनारे गई तस्वीर के हवाले से एक खबर छापी है. खबर के मुताबिक यह तस्वीरें 2019 के कुंभ से पहले की है. तस्वीरों के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि कोरोना महामारी के इस दौर में जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं, उसमें कुछ भी नया नहीं। इसी खबर को योगी आदित्यनाथ ऑफिस ने ट्वीट किया है.

